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Thursday, 23 May 2013

माँ की ममता


माँ की ममता



एक दिन रोया एक बच्चा, मांगे माँ से रोटी 
बहुत दुखी  थी,  माँ बेचारी कहाँ  से लाये रोटी 
जाड़े का मौसम था, तन पे थी फटी एक धोती
परेशान थी पैसे से काफी, बनी नहीं घर में रोटी


बड़े घर से थी वह लेकिन,  समय था ऐसा बिगड़ा
आज नहीं  है घर में दाना, बेटा  मांग रहा है रोटी 
   कई  दिनों से भूखा बालक माँ के ऊपर चीख पड़ा 
नहीं भूख माँ मेरे है सहती, जल्दी लाकर दे रोटी 


माँ ने लिया गोद बेटे को, पार सड़क करना चाहा 
उसी समय एक एक मोटर आई, बड़ी तेज़ से टक्कर मारा 
माँ की गोद से उछला बालक, नियति की बलिहारी
टकरा कर नीचे माँ आयी, साफ बचा लेकिन  बालक 

खून से रंग गयी सड़क थी, कांप रहे थे नर नारी 
हुए अंग के टुकडे टुकडे, पड़ी सड़क पर वह नारी 
 करीब जा सबने देखा उछल रही थी उसकी बोटी , 
ढूढ़ रही है माँ की ममता , बेटा मांग रहा रोटी 

 -अनामिका